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निजीकरण के दुष्परिणाम | Side effects of privatization

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 निजीकरण के साइड इफेक्ट:-           1970-80 की बात है एक बहुत बड़ा कारखाना हुआ करता था। जिसका मालिक दिल्ली का बड़ा सेठ था। कारखाने में बने सामान की विदेशो तक मे डिमांड थी। उसमें काम करने वाले ज्यादातर आस पास के गांव के ही मजदूर थे। लगभग 100 से 120 तक मजदूर कार्य करते थे। कारखाने में दिन रात कार्य होता था इसलिए मालिक ने अपने कर्मचारियों के लिए कुछ आवास भी बना रखे थे। जिनमे लगभग 30 परिवार रहते थे। बिल्कुक ऐसे ही जैसे कोई छोटा मोहल्ला हो।( हालांकि आवास के पैसे तनख्वा से कटते थे) सभी का कार्य बड़े ही अच्छे से चल रहा था।     फिर एक दिन कारखाने में काम करने एक नौजवान आया उसने लोगो को बताया कि हमे हमारे कार्य के अनुसार पैसे नही दिए जा रहे है उल्टा हमसे 8 घण्टे के बदले 12 घण्टे कार्य करवाया जा रहा है। जो कानूनन गलत है। हमे इसका विरोध करना चाहिए, अपनी तनख्वा बढ़ाने के लिये धरना करना चाहिए । बराबर में एक अधेड़ जो हाथ मे कुछ औजार लिए बैठा था बोला कि "बेटा 30 साल कट गए बच्चे इसी कारखाने में पैदा हुए अब शादी के लायक हो चुके है अगले साल बड़ी बेटी की शादी कर...

सूर्य का असली रंग क्या होता है? What is the Actual Color of Sun.

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सूर्य का असली रंग क्या है, यह हमे अलग-अलग रंग का क्यो दिखाई देता है?     जिस सूर्य को आप और हम रोज देखते है उस सूर्य को हमने बच्चों की textbook में पीले या नारंगी रंग का बना देखा होगा। असल मे वो सूर्य का असली रंग नही है। सूर्य कई रंगों के मिश्रण का एक समूह है। सूर्य से आने वाले प्रकाश को जब एक प्रिज़्म से गुजारा जाता है तो हमे कई रंगों का एक समूह दिखाई देता है। इस समूह को हम Rainbow में भी देख सकते है। इनका एक क्रम होता है। जिनमे बैगनी, नीला, असनानी, हरा, पीला, नारंगी, लाल है। इन रंगों में लाल सबसे अधिक तरंग दैधर्य (Wavelenth) और नील सबसे कम wavelenth वाला रंग है।           सुबह या शाम के समय जब सूर्य पृथ्वी के horizon (छितिज) पर होता है तो इसकी दूरी पृथ्वी से अधिक होती है तब पृथ्वी के वायुमंडल प्रभाव के कारण कम wavelenth की किरणें जैसे नीली, हरी, बैगनी वायुमंडल में फैल जाती है। केवल अधिक wavelenth वाली किरणे ही जैसे लाल, पीली, नारंगी ही घने वायुमंडल को पार करके हमारी आंखों तक पहुच पाती हैं। इसलिए सुबह और शाम के समय सूर्य लाल या पीला दिखाई देता है। ...

कुछ सबसे रोचक तथ्य ! Some Amazing and interesting Facts!

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  क्या आप जानते है? 1- मानव शरीर की एक चौथाई हड्डियां उसके पैर में होती हैं। 2- मानव शरीर मे जांघ की हड्डी कंक्रीट से भी मजबूत होती है।  3- इंसान आंख खुली रखकर छीक नही मार सकता। 4 - फ्रांस में 1386 में एक सुअर को इसलिए फांसी दी  गई थी कि उसने एक बच्चे को मार दिया था। 5- मनुष्यों द्वारा खाये जाने वाले पदार्थों में शहद एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो कभी खराब नही होता। 6- प्राचीन मिस्र में बिल्ली की हत्या करने पर मौत की सजा का प्रावधान था।  7- इंसान का बच्चा 4 माह तक चीनी और नमक का टेस्ट पता नही कर पाता। 8- रुकी हुई घड़ी दिन में दो बार सही समय दिखाती है। 9- सुअर आसमान की तरफ नही देख सकता। 10 - टेकेलाऊ ही मात्र एक ऐसा दीप है जहाँ बिजली केवल सोर ऊर्जा से आती है 11- करोड़ो साल पहले घोड़े, बिल्ली के आकार के होते थे। 12- घोड़ा कभी उल्टी नही कर सकता। 13- इंसान का दिल 30 फिट की ऊँचाई तक तक खून फेंक सकता है। 14- इंसान एक साल में औसतन पचास लाख वार सास लेता है। 15- छीकते समय दिल एक सेकंड के लिए रुक जाता है।          अगर आपको हमारे द्वारा बताई गई जानकारी कैसी ...

GB या MB क्या है?

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     आज इस तकनीकी की दुनिया में हम एक शब्द जो हर रोज सुनते हैं और बोलते हैं वह चाहे हमें मोबाइल रिचार्ज कराना हो, कंप्यूटर खरीदना हो या फिर मोबाइल ही क्यों नहीं खरीदना हो वह है  GB, GB का मतलब गीगाबाइट होता है जो जो सूचना को स्टोर करने , सूचना को ट्रांसफर करने की स्पीड को दर्शाता है         अगर हम बात करें तो डिजिटल इंफॉर्मेशन की सबसे छोटी इकाई bit (बिट) होती है। जो केवल दो ही संकेतो पर कार्य करती है जीरी (0) या एक (1) यह  Information को दो ही रूप  में संचित करती है यह दो संकेतों पर ही कार्य करती है जैसे "हां या ना' "ऑन या ऑफ" "पॉजिटिव या नेगेटिव"  'गलत या सही' इसके लिए जीरो (0) और एक(1)  का इस्तेमाल किया जाता है                   8 bit(बिट) में एक Byte होता है । Byte सूचना या डाटा को स्टोर करने की इकाई है यह 2 के गुणांक में होती है जैसे जैसे 2, 4, 8, 16, 32, 64......इत्यादि। डाटा ट्रांसफर को हम प्रति सेकेंड कितने Byte ट्रांसफर हुए...

बॉलीवुड में अभिनय की आत्महत्या का जिम्मेदार कौन?

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14 जून 2020 को एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कर ली। उनकी आत्महत्या के बाद से ही बॉलीवुड में हो रहे भेदभाव पर सवाल उठाये जा रहे है।  एक मध्यवर्गीय परिवार से आगे निकलकर सुशांत सिंह राजपूत ने अभिनय और ग्लेमर की दुनिया मे अपने झंडे गाड़ने सुरु कर दिए थे। उनके इस तरह चले जाने पर हमें बहुत दुख है। हमारी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ है। खासकर उनके बुजुर्ग पिता के साथ। एकलौते बेटे के दुनिया से चले जाने का गम क्या होता है ये उनके पिता ही समझ सकते है। बॉलीवुड में आये दिन आत्महत्या की घटना सुनने को मिलती रहती है। हर घटना पर लोग अपने हिसाब से या अपने की तरफ झुककर बयान देते है। बॉलीवुड में आत्महत्याओं पर न तो खुलकर चर्चा हुई और न ही सम्पूर्ण बॉलीवुड इसको मिटाने का लिए एक साथ इकठ्ठा हुआ। जब 90 के दशक की सुपरस्टार दिव्या भारती की मृत्यु हुई थी तो इसके पीछे की बजह संजय दत्त और माधुरी को भी बताया गया था। हालांकि हम इस बात की पुष्टि नही करते। मगर आरोप लगाए गए थे लोग आज भी चर्चा करते है। उस समय किसी भी बड़े कलाकार ने आगे आकर खुलकर बयान नही दिया था।   जब 2013 में प्रशिद्ध अभिनेत्री जिया खान...

केवल Nepotism ही क्यो Castism पर बात क्यो नही?

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                        पूरा देश एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु पर गम में है लोग बॉलीवुड में परिवारवाद को इसका जिम्मेदार ठहरा रहे है। क्योकि बॉलीवुड बाहरी कलाकार को स्वीकार नही करता बॉलीवुड का अपना एक खोल है जिसके अंदर कोई भी प्रवेश नही कर सकता उसके अंदर मात्र कुछ ही परिवार राज करते है। अगर कोई कलाकर अपनी प्रतिभा के बल पर वहां तक पहुच भी जाये तो उस खोल को भेद नही पाता। चाहे वो कंगना रनौत, इरफान खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी हो या सुशांत सिंहः राजपूत।  सुशांत सिंह राजपूत जैसी प्रतिभा को बॉलीवुड में मात्र नेपोटिज़्म( परिवारवाद) का सामना करना पड़ता मगर दूसरा पहलू जहा पर कुछ लोगो को परिवारवाद के साथ साथ जातिवाद का भी शिकार होना पड़ता है उन्हें तो उस खोल की ऊपरी परत को छूने का अवसर भी प्राप्त नही हो पाता। जिसको कंगना, सुशांत, नवाजुद्दीन ने  प्राप्त किया। पहले एंगल ने प्रतिभाशाली एक्टर की जान ली और दूसरा एंगल हर रोज कितनी प्रतिभाओं का गला घोंट रहा है इसका कोई आंकड़ा नही। और यह बॉलीवुड ही नही साउथ सिनेमा, भोजपुरी सिनेमा में ...